Zee News ने म्यांमार में उन हिन्दू महिलाओं से बात की है जिनका अपहरण रोहिंग्या आतंकवादियों ने कर लिया था । रोहिंग्या आतंकवादियों ने इन महिलाओं पर अत्याचार किए और उनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाया । म्यांमार के रखाइन प्रांत में जब रोहिंग्या आतंकवादियों और म्यांमार की सेना के बीच लडाई चल रही थी । तभी रोहिंग्या आतंकवादियों ने रखाइन के एक ऐसे गांव पर हमला किया था जहां ८०० से ज्यादा हिन्दू रहते थे । लगभग ५०० रोहिंग्या आतंकवादियों ने हथियारों के साथ इस गांव पर हमला किया और लोगों को चुन-चुन कर मारा ।
पिछले वर्ष Zee News ने रखाइन प्रांत में हिंसा से प्रभावित इलाकों में जाकर Ground Reporting की थी । तब पहली बार दुनिया को ये पता चला था कि रोहिंग्या आतंकवादियों ने किस तरह हिन्दुओं की हत्या करके उनके परिवार की महिलाओं का अपहरण कर लिया था । इन महिलाओं के सिंदूर को पोंछ दिया गया । इनकी चूडियों को तोड दिया गया और इन्हें बुर्का पहना दिया गया ताकि इनकी पहचान ना हो सके । रोहिंग्या आतंकवादी इन हिन्दू महिलाओं को कैद करके अपने साथ बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा के पास ले गए थे ।
इसी दौरान कुछ संगठनों की मदद से म्यांमार की सेना को ये जानकारी मिली कि Camps में कुछ हिन्दू महिलाओं को कैद करके रखा गया है । इसके बाद म्यांमार की सरकार ने बांग्लादेश की सरकार से बात करके किसी तरह इन ८ महिलाओं को आजाद करवाया । बताया जा रहा है कि, रोहिंग्या आतंकवादियों की क़ैद में ऐसी और भी महिलाएं हो सकती हैं । आतंकवादियों ने इन महिलाओं के सामने ही इनके परिवार के पुरुष सदस्यों को मार दिया था । इन महिलाओं ने अपनी आंखों के सामने अपने सगे-संबंधियों का क़त्ल होते हुए देखा है । ये महिलाएं आज बहुत दुखी और परेशान हैं । इनका अब कोई सहारा नहीं है । और इसीलिए ये महिलाएं अब म्यांमार और भारत की सरकार से मदद की उम्मीद कर रही हैं ।
रोहिंग्या मुसलमानों के लिए फेसबुक द्वारा उठाया जानेवाला यह निर्णय सराहनीय है । परंतु रोहिंग्याआें पर इतना दिल बडा करने के पहले रोहिंग्याआें के सत्यता की जांच भी फेसबुक करें तथा म्यांमार से पलायन के बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने जहां पनाह ली है वहां का उनका बर्ताव पर भी फेसबुक एक बार अवश्य विचार करे । क्योंकी कुछ दिन पहले यही रोहिंग्याआें ने जम्मू-कश्मीर में अवैध सीमकार्ड के विषय में सत्य जानने गए २ पत्रकारों पर हमला किया था । तथा इन रोहिंग्या मुसलमानों की अनेक गैर कानूनी गतिविधीयों में संलिप्तता की बात भी सामने आ चुकी है ।
रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे से भी कर्इ साल पहले से हिन्दू धर्म के विषय में नफरत फैलानेवाली बाते तथा हिन्दु देवी-देवताआें का अनादर करनेवाले पोस्ट फेसबुक पर प्रसारित की जा रही है । फेसबुक इस पर भी ध्यान देकर कोर्इ कदम उठाए यही हिन्दुआें की अपेक्षा है !
फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग पहली बार अमेरिकन संसद के सामने पेश हुए हैं !
डेटा लीक मामले में पूछताछ के दौरान फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी बातें फैलाने में सोशल मीडिया की कथित भूमिका के संबंध में निपटने के लिए और कदम उठाने का वादा किया ।
सीनेटर पैट्रिक लीही के रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ बढते नफरत भरे बयानों में फेसबुक की भूमिका पर सवाल करने पर उन्होंने कहा, ‘‘म्यांमार में जो हो रहा है वह भयावह है . . . इससे निपटने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है !’’
लीही ने मुस्लिम पत्रकार की मौत का हवाला देते हुए कहा, ‘‘हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र जांचकर्ताओं ने म्यांमार में संभावित नरसंहार को उकसाने में फेसबुक को दोषी ठहराया था !’’
इस पर जवाब देते हुए जुकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक इस पर काम कर रहा है और म्यांमार में नफरत भरे बयानों से निपटने के लिए कई कदम उठा रहा है !
गौरतलब है कि ब्रिटेन की डेटा फर्म कैंब्रिज एनालिटिकाद्वारा फेसबुक उपयोगकर्ताओं का डेटा चोरी करने के मामले में जुकरबर्ग अमेरिकी संसद में पेश हुए थे । जुकरबर्ग ने सीनेट के सामने अपनी बात की शुरुआत डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान से जुड़ी डेटा फर्म के ८.७ करोड़ यूजर्स से निजी जानकारी इकठ्ठा करने से रोकने में नाकाम रहने की जिम्मेदारी लेते हुए की ! इसके बाद उन्होंने अन्य सवालों के जवाब दिए ।
हालांकि जुकरबर्ग इससे पहले भी यूजर्स से कई बार माफी मांग चुके हैं परंतु यह उनके करियर में पहली बार है जब वह संसद के सामने पेश हुए हैं !
मणिपुर में सुरक्षाबलों ने तीन रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया है । इन तीनों को म्याांमार सीमा से भारत में गैरकानूनी रूप से प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है । इसकी जानकारी मणिपुर ने शुक्रवार को दी ।
रखाइन के रहने वाले हैं तीनो रोहिंग्या
पुलिस ने बताया कि, अपराध जांच विभाग (सीआइडी) अधिकारियों और पुलिस की संयुक्त टीम मोरेह कस्बे से रोहिंग्या मुसलमान को गुरुवार देर रात गिरफ्तार किया गया था । भारत-म्यांमार सीमा पर तेगनौपाल जिले में यह कस्बा है । तीनों रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रांत के रहने वाले हैं । म्यांमार का सुरक्षाबल आतंकियों के विरुद्ध रखाइन में लगातार कार्रवाई कर रहा है ।
गिरफ्तार किए गए तीनों रोहिंग्या पिछले दस दिनों से मोरेह में रुके हुए थे । ये सभी मलेशिया जाने की फिराक में थे । परंतु तीनों को मणिपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर मोरेह थाने में इनके विरुद्ध मामला दर्ज कराया है ।
बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक चित्र शेयर कर बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगाया है । तस्लीमा नसरीन ने कहा है कि, इस सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है ।
तस्लीमा नसरीन ने ट्वीट किया, “बांग्लादेश में ३ रोहिंग्या गिरफ्तार किए गए हैं, इन लोगों ने अपने पवित्र कुरान का उपयोग याबा की तस्करी के लिए किया जिसे मैडनेस ड्रग भी कहा जाता है ।” तस्लीमा नसरीन ने गिरफ्तार किए लोगों की चित्रें शेयर की है । इस चित्र में तीन लोग दिख रहे हैं, उनके पीछे बांग्लादेश के ६ सुरक्षा बल खडे हैं । सामने एक टेबल पर ड्रग्स के पैकेट्स रख हुए हैं । बता दें कि म्यांमार से आए लगभग ६ लाख रोहिंग्या मुसलमान इस समय बांग्लादेश में रह रहे हैं । इन पर कई बार अवैध गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगता रहता है ।
बता दें कि समुद्री तट से सटे होने की वजह से बांग्लादेश में ड्रग्स की तस्करी बडे पैमाने पर होती है । बांग्लादेश के डिपार्टमेंट ऑफ नारकोटिक्स ने पिछले साल सितंबर में भी तीन रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया था । पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में इसकी तस्करी में इजाफा हुआ है । बांग्लादेश की कानून एजेंसियों का मानना है कि लोग लचीले कानून का फायदा उठाकर इस मामले में गिरफ्तार होने के बावजूद बेल ले लेते हैं और फिर से इस अपराध की राह पर चल पडते हैं ।
बठिंडी (जम्मू) – शहर के बठिंडी क्षेत्र में रोहिंग्याओं पर कवरेज के लिए गए कुछ पत्रकारों पर ५०-६० रोहिंग्या मुसलमानों की भीड ने हमला बोल दिया । विशेषत: इस भीड में महिलाआें का भी सहभाग था । इसमें पत्रकारों को पीटा गया और उनको तेजधार हथियार दिखाकर डराने का प्रयास भी किया गया । हमले में पत्रकार तेजिंदर सिंह, अजय जंडियाल आदि घायल हुए । पुलिस ने इसे लेकर केस दर्ज कर लिया है । इस प्रकरण में महंमद अश्रफ आैर शेर महंमद नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है ।
मंगलवार सुबह पत्रकार तेजिंदर सिंह, अजय जंडियाल रोहिंग्याओं पर कुछ खबर करने के लिए गए थे । जिस प्लाट में रोहिंग्या रहते हैं, वहां के प्लाट मालिक दो युवकों ने पत्रकारों से पहले दुर्व्यवहार किया । फिर उनके साथ मारपीट की ।
जम्मू के आईजी एसडी सिंह जम्वाल का कहना है कि, पुलिस ने ३४१, ३२३, ३८२ और ३४ आरपीसी में केस दर्ज किया है ।
आरटीआय कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने २७ विस्थापित रोहिंग्या मुसलमानों के पास मिले अवैध सीमकार्ड की जानकारी सामने लार्इ थी । इस विषय में सत्य जानने हेतू ये २ पत्रकार १३ मार्च को बर्मा मार्केट क्षेत्र में गए थे । इस समय जिस प्लाट में रोहिंग्या रहते हैं, वहां के रोहिंग्याआें की भीड ने पत्रकारों पर आक्रमण किया तथा उनका कॅमेरा एवं मार्इक छिन लिया ।
भाजपा के निर्मल सिंह ने की हमले की कडी निंदा
उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने इस हमले की कडी निंदा की है । उन्होंने कहा कि इस प्रकार के हमले बेहद निंदनीय हैं । समाज के हर वर्ग द्वारा निंदा की जानी चाहिए । जम्मू प्रेस क्लब के महासचिव जोरावर सिंह जम्वाल ने भी इस हमले की निंदा की है ।
जम्मू में बांग्लादेश से आकर रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को निकालने की कवायद तेज होती दिख रही है ! वहां कुछ समूहों द्वारा लोकल न्यूज पेपर में विज्ञापन देकर रोहिंग्या मुसलमानों के विरोध में जनता में संदेश पहुंचाया जा रहा है । मुख्य रूप से चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और नेशनल पैंथर्स पार्टी जैसे संघटनोंद्वारा विज्ञापन दिया जा रहा है ! इन विज्ञापनों में रोहिंग्या मुसलमानों को ‘टाइम बम’ बताकर जम्मू के लिए खतरा बताया जा रहा है । एक विज्ञापन में लिखा है, ‘रोहिंग्या: टिक-टिक करते टाइम बम हैं । जम्मू को बचाने के लिए इन्हें बाहर निकाला जाए । इनके कारण शांति पसंद करनेवाले जम्मू वासियों को काफी परेशानी हो रही है । जम्मू को बचाने के लिए एक होना आवश्यक है !’ आपको बता दें कि पैंथर्स पार्टी ने रोहिंग्या मुसलमानों के निष्कासन के लिए प्रदर्शन भी किया था ।
रोहिंग्या को निकालने का प्रयास यूं तो काफी महीनों से किया जा रहा है, लेकिन विज्ञापन के जरिए लोगों से अपील करने की कवायद १० फरवरी को हुए आतंकी हमले के बाद से शुरू हुई है । यहां तीन आतंकियों ने सुंजवान मिलिट्री स्टेशन के अंदर एक परिवार के ऊपर हमला कर दिया था । इस हमले में ६ जवान शहीद हुए थे तो १ नागरिक की मौत हो गई थी । इस मिलिट्री स्टेशन के पास बहुत से रोहिंग्या मुसलमानों ने अपना डेरा जमा रखा है !
आतंकी हमले के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी जम्मू का दौरा किया था । इस दौरान उन्होंने कहा था, ‘मिलिट्री स्टेशन से लगे हुए इलाके इस तरफ इशारा करते हैं कि यहां आतंकियों को लोगों से समर्थन मिल रहा है !’ वहीं हमले के करीब एक घंटे बाद भाजपा विधायक कवींद्र गुप्ता ने इस अटैक के लिए दो निश्चित देशों के घुसपैठियों को जिम्मेदार ठहराया था । पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष बलवंत मणिकोटिया ने कहा कि वह अपने जैसे अन्य संघटनों से भी जुडने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि सब एक साथ मिलकर इन घुसपैठियों को देश से निष्कासित करने के लिए सरकार पर दबाव बना सकें । वहीं चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि वह रोहिंग्या मुसलमानों के निष्कासन के पक्ष में तो हैं, लेकिन फिलहाल वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं । वहीं चैम्बर के सचिव गौरव गुप्ता का कहना है कि वह समुदायों के बीच ताल-मेल स्थापित करने के पक्ष में तो हैं, लेकिन रोहिंग्या मुसलमानों के बसने का विरोध करते हैं । उनके मुताबिक रोहिंग्या का यहां बसना आर्टिकल ३७० का उल्लंघन होगा । उन्होंने कहा, ‘इन घुसपैठियों का यहां बसना स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्रभावित करता है, क्योंकि स्थानीय पुलिस के पास उनके पिछले जीवन के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं है !’
रोहिंग्या संकट . . . अब तक का सबसे बडा मानवीय संकट ! – विश्व स्वास्थ्य संघटन की दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल
नई देहली : अगले एक वर्ष में रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में ६०,००० बच्चों के जन्म लेने का अनुमान है ! इन बच्चों के जन्म लेने के बाद संकट झेल रहे इस समुदाय की स्थिति और विकट हो सकती है !
विश्व स्वास्थ्य संघटन (WHO) की दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल ने छह महीने पहले शुरू हुए रोहिंग्या संकट को अब तक का सबसे बडा मानवीय संकट बताते हुए कहा कि आगामी मानसून सीजन में इन शरणार्थियों की दिक्कतें और बढनेवाली हैं ! अकेले बांग्लादेश में लगभग १० लाख रोहिंग्या शरणार्थी पनाह लिए हुए हैं, जो कुपोषण के साथ-साथ मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं जिनमें सर्वाधिक दयनीय स्थिति बच्चों की है !
संकट अब अपने चरम पर
डॉ. पूनम खेत्रपाल
डॉ. पूनम ने कहा, “२५ अगस्त, २०१७ से शुरू हुआ यह संकट अब अपने चरम पर पहुंच गया है । म्यांमार से बांग्लादेश बडी तादाद में पहुंचे रोहिंग्याओं की हालत रोंगटे खडे कर देनेवाली है ! बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के शरणार्थी शिविरों में ६,८८,००० रोहिंग्या रह रहे हैं, जबकि इससे पहले यहां २,१२,५०० रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंच चुके हैं । इस अल्पावधि में पलायन करनेवाली यह अब तक की सबसे बडी जनसंख्या है !”
सबसे बडा खतरा स्वास्थ्य को लेकर
शरणार्थी शिविरों में रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति और समस्याओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, “रोहिंग्या शरणार्थियों की सबसे बडी आबादी काटुपालोंग और बालुखली शिविरों में दयनीय हालत में रह रही है, परंतु सबसे बडा खतरा इनके स्वास्थ्य को लेकर है, इसलिए इनके स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने की जरूरत है । महिलाओं और कम उम्र की मांओं को प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की जरूरत है !”
बारिश का मौसम बनेगा बडा संकट
पूनम कहती हैं, “हालात इतने बदतर हैं कि ये पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सेवाओं से वंचित हैं, परंतु हमें चिंता है मानसून सीजन को लेकर ! बारिश का मौसम इनके लिए बडा संकट बन सकता है । बारिश, तूफान, बाढ के खतरे से इन लोगों में हैजा, हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढेगा । वहीं, इन शरणार्थी शिविरों में अगले एक साल में ६०,००० बच्चों के पैदा होने का अनुमान है । समझ जाइए, स्थिति क्या होने जा रही है !”
जरूरी सेवाएं मुहैया कराने के लिए प्रयासरत
ऐसे में डब्ल्यूएचओ की रणनीति क्या है ? यह पूछने पर में डॉ. खेत्रपाल कहती हैं, “डब्ल्यूएचओ बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर कॉक्स बाजार में रोहिंग्या मुसलमानों की इस बडी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रही हैं । डब्ल्यूएचओ चिकित्सा केंद्रों में दवाइयां, मेडिकल उपकरण जैसी सेवाएं मुहैया कराने में लगा है !”
डॉ. ने कहा, “यहां १०० से अधिक साझेदारों के साथ मिलकर हेल्थ पोस्ट, अस्पताल, चिकित्सा केंद्रों और मोबाइल क्लीनिकों तक पहुंच बनाई जा रही है । शरणार्थियों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है । ये समुदाय ट्रॉमा, दिल संबंधी बीमारियों, मधुमेह और कई तरह की बीमारियों की चपेट में है !”
टीकाकरण कार्यक्रम शुरू
डब्ल्यूएचओ ने कई तरह के टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनके बारे में डॉ. खेत्रपाल कहती हैं, “हमने हैजे को लेकर अक्टूबर और नवंबर २०१७ में दो चरणों में व्यापक अभियान शुरू किया, जिसके तहत हैजा की ९००,००० खुराकें पिलाई गईं । इसके साथ ही सितंबर और नवंबर में खसरे और रूबेला टीकाकरण का अभियान शुरू हुआ, जिसमें १५ साल तक की उम्र के ३,३५,००० बच्चों का टीकाकरण किया गया । इसके साथ ही पोलियो और न्यूमोनियो के टीके लगाए गए । डिप्थीरिया के भी दो टीकाकरण अभियान शुरू किए गए । पहले दौर के तहत लगभग ५००,००० बच्चों का टीकाकरण हुआ । दूसरे चरण के तहत लगभग ३,९८,००० बच्चों का टीकाकरण किया गया । मार्च में डिप्थीरिया के टीकाकरण का तीसरा दौर शुरू करने की योजना है !”
बच्चों की मानसिक स्थिति चिंताजनक
डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक कहती हैं, “इन शरणार्थी बच्चों की मानसिक स्थिति चिंताजनक है । इस संकट का इन पर बुरा असर पडा है । हम स्वास्थ्य मंत्रालय और आपदा प्रबंधन मंत्रालय के साथ मिलकर रोहिंग्या शिविरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रहे हैं । प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए स्वास्थ्य योजनाओं का खाका तैयार हो रहा है । दूषित पानी की जांच के लिए लैब की स्थापना की गई है । ट्यूबवेल एवं घरेलू कंटेनरों में जल की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है । डब्ल्यूएचओ ने किसी भी तरह की बीमारी का पता लगाने के लिए अर्ली वार्निग एंड रिस्पांस प्रणाली स्थापित की है !”
डॉ. पूनम खेत्रपाल ने कहा, “हम काम कर रहे हैं, परंतु बेहतर होगा कि शरणार्थियों के भविष्य पर गंभीरता से फैसला लिया जाए !”